57 हजार की चिल्लर लेकर बाइक खरीदने पहुंचा ये शख्स, रो पड़ा डीलर..

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इंसान अगर किसी चीज़ को करने की दिल से ठान ले तो वो कार्य मुश्किल नहीं है किसी भी हालात का वो सामना कर सकता है किन्तु वो उस कार्य को मरते दम तक नहीं छोड़ेगा।

कुछ समय पहले आयी फिल्म मांझी आपने देखी होगी वो फिल्म भी एक सच्ची कहानी है उस फिल्म में उसने ठान लिया था की मैं इस पहाड़ को तोड़ दूंगा और रास्ता बनाऊंगा शहर जाने के लिए क्योकि वह को लोगो को शहर जाने के लिए उस चट्टान को पार करना पड़ता था और पार करते समय कई लोगो की गिरने की वजह से जान चली गयी थी उनमे से एक माझी की पत्नी भी थी। जिसके कारण उसने हट पकड़ ली मैं इस चट्टान को तोडूंगा और उसने वो कर भी दिखाया और रास्ता बना दिया।

ऐसे ही पूरी दुनिया में अनेक किस्से है जो सोचने पे मज़बूर और हैरान कर देते है की आखिर इतना सयम कैसे हमसे तो नहीं हो पता और हम उस इंसान की तारीफ करते नहीं रुकते है कुछ इसी प्रकार का एक वाक्य अभी हुआ है जिसमे एक इंसान 57000 रूपये चिल्लर में एकत्रित किये और अपना सपना पूरा किया आइये जानते है इस मोटिवेशनल घटना के बारे में।

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मध्यप्रदेश

दुनिया में रोमांचित कर देने वाले लोग है एक कहानी मध्यप्रदेश में रहने वाले “हसीब हिन्दुस्तानी” की है इनकी कहानी जानकार बहुत से लोग हैरान हो चुके है इन्होने 57000 रूपये इकट्ठे करके बाइक खरीदी। आप सोच रहे होंगे बाइक तो सभी खरीद लेते है इसमें कोनसी नयी बात है तो हम आपको बता दे इन्होने ये बाइक 57000 के चिल्लर इकट्ठे करके खरीदी है जी हाँ हैरानी हुई ना। ठीक इसी प्रकार उस शोरूम के सभी लोग हैरान गए थे जब ये वहां इतने चिल्लर लेके बाइक खरीदने गए।

पहले तो सब हैरान हो गए थे लेकिन शोरूम के डीलर ने इतने चिल्लर से बाइक देने से इंकार कर दिया था किन्तु जब “हसीब हिंदुस्तानी” ने अपनी कहानी बताई की की कैसे और कितने सालो से ये बाइक खरीदने के लिए पैसे इकट्ठे कर रहे है तब डीलर के आँखे नम हो गई और उसने हसीब को उनकी मन पसंद की बाइक देदी।

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डीलर ने बाद में ये बताया की हसीब के चिल्लर में एक से लेकर दस तक के सभी सिक्के थे और वो सिक्के कुछ इस प्रकार से थे

1=14600

2=15645

5=1458

10=322

वो और उनका परिवार इन पैसो को पिछले तीन सालो से जमा कर रहा था

मोदी जी के बात से हुए प्रेरित

एक बार श्री नरेन्द्र मोदी जी ने छोटी-छोटी बचत करने की सलाह दी थी उसी बात से हसीब जी प्रेरित होकर बचत करनी शुरू करदी और बाइक खरीदी।

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Sohan Mahto

About the Author: Sohan Mahto

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