इच्छाएं पूरी करने के लिए इस मंदिर में एक-दूसरे पर फेंकते हैं आग,जाने इस अनोखे मंदिर के बारे में

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यूं तो देशभर में ऐसे बहुत से स्थानों पर देवी-देवताओं के चमत्कारिक मंदिर मौजूद है इन चमत्कारिक मंदिरों में से देवी दुर्गा के भी बहुत से चमत्कारिक मंदिर देशभर में स्थित है, माता रानी के यह मंदिर अपनी-अपनी किसी ना किसी विशेषता और मान्यता के लिए लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है, माता के इन मंदिरों के अंदर सभी लोग अलग-अलग प्रकार के रीति-रिवाजों के साथ पूजा अर्चना करते हैं और अपनी पूरी श्रद्धा भाव के साथ माता की भक्ति में लीन रहते हैं, इन्हीं मंदिरों में से एक आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं जिस मंदिर के अंदर अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए लोग एक दूसरे के ऊपर आग बरसाते हैं, ऐसा कहा जाता है कि यह परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है, एक दूसरे पर आग फेंकने से ही लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती है।

आप लोगों में से बहुत से लोग ऐसे होंगे जो यह जानकारी सुनने के बाद सोच में पड़ गए होंगे परंतु जो जानकारी हम दे रहे हैं यह बिल्कुल सत्य है, माता का यह मंदिर कर्नाटक राज्य के कातील में स्थित है कातील मैंगलोर से लगभग 26 किलोमीटर दूरी पर यह मंदिर मौजूद है, इस मंदिर में देवी मां को दुर्गा परमेश्वरी के नाम से लोग जानते हैं, दुर्गा परमेश्वरी का यह मंदिर दुनियाभर में काफी मशहूर है, इस मंदिर के अंदर सदियों से अग्नि केली नाम की परंपरा चलती आ रही है, जिसके अंदर लोग अपनी जान की बिल्कुल भी फिक्र नहीं करते हैं और एक दूसरे के ऊपर आग बरसाते हैं, इस परंपरा के अनुसार यहां के लोग उत्सव के रूप में 8 दिनों तक ऐसा करते हैं।

माता रानी का यह मंदिर नंदिनी नदी किनारे स्थित है और यह भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है, आपको बता दें कि इस मंदिर के अंदर अग्नि केली नाम की परंपरा 2 गांव आतुर और कलत्तुर के लोगों के बीच की जाती है, जब यह उत्सव आरंभ होता है तो उससे पहले देवी माता की शोभायात्रा निकलती है उसके पश्चात तलाब में डुबकी लगाया जाता है, तलाब में डुबकी लगाने के पश्चात ही दोनों गांव के लोगों के बीच अलग अलग दल बना दिए जाते हैं और इन दोनों दलों के हाथों में नारियल की छाल से बनी मशाल होती है और इन मसालों को जला दिया जाता है उसके बाद यह एक दूसरे के ऊपर यह मशाल फेंकना आरंभ कर देते हैं, यह सब लगभग 15 मिनट तक ऐसे ही चलता रहता है, एक आदमी सिर्फ 5 बार ही जलती मशाल फेंकता है उसके पश्चात वह अपनी मसाल को बुझा कर वहां से दूर हो जाता है।

ऐसा बताया जाता है कि इस परंपरा से लोगों के सभी दुख दूर होते हैं, व्यक्ति को कभी भी आर्थिक परेशानी या फिर शारीरिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है, माता दुर्गा जो इस खेल में शामिल होता है उसके सभी दुख दूर करती हैं, वैसे सुनने में तो यह थोड़ा अजीब लगता है परंतु इस परंपरा को लेकर लोगों का काफी विश्वास देखने को मिलता है और यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है, यहां पर लोग दूर-दूर से माता के दर्शन करने के लिए आते हैं, इस मंदिर के अंदर अभिनय, संगीत, नृत्य भी होता है।

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Sohan Mahto

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