कैसे करें नवरात्रि में कलश की स्थापना? जानिए इसकी सही विधि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े कुछ नियम

अध्यात्म

हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्यौहार को बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, इस साल नवरात्रि का त्यौहार 29 सितंबर से शुरू हो रहा है, वैसे देखा जाए तो नवरात्रि का त्यौहार देश के हर स्थानों पर बड़ी ही श्रद्धा पूर्वक मनाया जाता है, नवरात्रि के इन पावन दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की अलग-अलग दिन पूजा-अर्चना की जाती है, लोग नवरात्रि के दिनों में 9 दिनों का व्रत भी करते हैं, जब नवरात्रि का समय आरंभ होता है तो पहले दिन कलश की स्थापना की जाती है, बहुत से लोग ऐसे हैं जो नवरात्रि में कलश स्थापना को लेकर काफी सोच विचार करते हैं।

आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से नवरात्रि के दिनों में कलश स्थापना की सही विधि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े हुए कुछ नियमों के बारे में जानकारी देने वाले हैं, जिनको ध्यान में रखकर अगर आप कलश स्थापना करते हैं तो इससे मां दुर्गा की कृपा आपके ऊपर बनी रहेगी और माता रानी आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगीं।

कलश स्थापना के लिए जरूरी सामग्रियां

अगर आप नवरात्रि में कलश स्थापना कर रहे हैं तो इससे पहले आपको कुछ जरूरी चीजों को लेना बहुत ही जरूरी है, आप कलश स्थापना के लिए कुछ जरूरी सामग्रियां जैसे जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र, साफ मिट्टी, मिट्टी का एक छोटा सा घड़ा, कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन, गंगाजल, सुपारी, आम की पत्तियां, अक्षत, कच्चे चावल, मौली, कलावा, जौ, इत्र, फूल की माला, नारियल, लाल कपड़ा, लाल चुन्नी, दूर्वा घास आदि का इंतजाम जरूर करें।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

अगर आप चाहते हैं कि मां दुर्गा की कृपा दृष्टि आपके ऊपर बनी रहे तो इसके लिए शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करना बहुत ही जरूरी है, इस वर्ष 29 सितंबर 2019 से नवरात्रि के त्यौहार आरंभ हो रहे हैं और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः काल 6:16 बजे से लेकर 7:40 बजे तक रहेगा, इसके अलावा आप दिन में भी कलश की स्थापना कर सकते हैं, दिन में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 11:48 बजे से लेकर 12:35 बजे तक रहने वाला है।

कलश स्थापना का सही तरीका

  • सर्वप्रथम आप मिट्टी के पात्र में थोड़ी सी मिट्टी डालिये और उसमें जौ के बीच डालें इसके पश्चात आप इस पात्र में दोबारा से थोड़ी सी मिट्टी डालिये और फिर बीज डालें, आप इसमें सारी मिट्टी डालकर इसमें थोड़ा सा पानी डालिए परंतु आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप मिट्टी के पात्र में जौ का बीज डालेंगे तो आप उसको इस प्रकार से लगाए की उगने पर यह ऊपर की तरफ उगे यानी कि आप इन जौ के बीजों को खड़ी अवस्था में लगाएं।
  • इतना करने के बाद आप कलश और उस पात्र की गर्दन पर मौली बांध दीजिए और तिलक लगाएं, कलश में गंगाजल भरे और जल के अंदर सुपारी, दूर्वा घास, अक्षत और सिक्का भी डाले दीजिए।
  • इसके पश्चात आप कलश के किनारों पर 5 अशोक के पत्ते या आम के पत्ते रखें और कलश को ढक दीजिए, इसके ऊपर एक नारियल को लाल कपड़े या चुन्नी में लपेट कर रखें, चुन्नी में कुछ पैसे भी साथ में रख दीजिए, इसके बाद आप नारियल और चुन्नी को रक्षा सूत्र से बाँध दीजिए।
  • इन सभी चीजों को आप तैयार कर ले, इसके पश्चात जहां पर आप कलश की स्थापना करेंगे उस जमीन को अच्छी तरह से साफ सुथरा करें, उसके पश्चात उसके ऊपर मिट्टी के जौ वाला पात्र रख दीजिए।
  • अगर आप नवरात्रि के 9 दिन तक अखंड दीप जलाते हैं तो आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि 9 दिन तक अखंड दीप जलता रहना चाहिए।

कलश स्थापना से जुड़े हुए कुछ विशेष नियमों का करें पालन

  • आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप हमेशा शुभ मुहूर्त में ही कलश की स्थापना कीजिए।
  • आप कभी भी कलश का मुंह खुला ना रखें, उसको हमेशा ढक कर रखिए, अगर कलश को किसी ढक्कन से आपने ढका है तो उसे चावल से भर दीजिए और उसके बीचोंबीच एक नारियल भी रखें।
  • नवरात्रि के दिनों में पूजा करने के पश्चात माता को दोनों समय भोग लगाएं, आप लौंग और बताशे को भोग लगा सकते हैं।
  • माता को लाल फूल अति प्रिय है इसलिए आप इनको लाल फूल अर्पित करें, लेकिन आप ध्यान रखें कि माता को आक, मदार, तुलसी अर्पित ना करें।
  • नवरात्रि के पूरे 9 दिन तक आप सात्विक भोजन का सेवन कीजिए।

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