अध्यात्म

कामाख्या शक्तिपीठ में सभी भक्तों की मनोकामनाएं होती है पूरी, जानिए इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य

हमारा देश धार्मिक देश माना जाता है हमारे यहां बहुत से चमत्कारिक और प्राचीन मंदिर मौजूद है जिनके प्रति लोगों की आस्था देखने को मिलती है इन्हीं चमत्कारिक मंदिरों में से एक कामाख्या शक्तिपीठ है कामाख्या मंदिर गुवाहाटी के पश्चिम में 8 किलोमीटर दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है माता के सभी शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वोत्तम कहा गया है ऐसा बताया जाता है कि जब माता सती के प्रति भगवान शिव जी का मोह भंग करने के लिए भगवान विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के मृत शरीर के 51 भाग किए थे तब जिस जिस स्थान पर माता सती के शरीर के अंग गिरे थे वह शक्ति पीठ के नाम से जाना जाने लगा था ऐसा बताया जाता है कि इस स्थान पर माता की योनि का भाग गिरा था उसी से कामाख्या महापीठ की उत्पत्ति हुई थी कामाख्या शक्तिपीठ कई चमत्कारों से भरा है आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से कामाख्या शक्तिपीठ से जुड़े हुए कुछ ऐसे रोचक तथ्यों के बारे में जानकारी देने वाले हैं जिनके बारे में शायद कोई व्यक्ति जानता होगा।

कामाख्या शक्तिपीठ से जुड़े रोचक तथ्य

  • कामाख्या मंदिर के अंदर देवी माता की कोई भी मूर्ति मौजूद नहीं है इस मंदिर के अंदर देवी माता की योनि भाग की ही पूजा होती है इस मंदिर के अंदर 1 कुंड है जो हमेशा फूलों से ढका रहता है इस स्थान के समीप एक मंदिर है जहां पर देवी माता की मूर्ति स्थापित है।

  • इस मंदिर के बारे में एक बहुत ही रोचक कथा बताई जाती है ऐसा कहा जाता है कि इस जगह पर माता की योनि भाग गिरी थी जिसके कारण यहां पर माता हर साल 3 दिनों के लिए रजस्वला होती है इस समय के दौरान मंदिर को बंद कर दिया जाता है और 3 दिन पश्चात मंदिर को बहुत ही उत्साह के साथ खोल दिया जाता है।
  • इस मंदिर के अंदर सभी भक्तों को प्रसाद के रूप में एक गीला कपड़ा दिया जाता है जिसको अम्बुवाची वस्त्र कहा जाता है ऐसा बताया जाता है कि रजस्वला होने के दौरान प्रतिमा के आस-पास सफेद कपड़ा बिछाया जाता है 3 दिन पश्चात मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं तब वह कपड़ा लाल रंग से भीगा हुआ होता है इसको भक्तों में प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है।

  • कामाख्या मंदिर से कुछ दूरी पर उमानंद भैरव का मंदिर है उमानंद भैरव ही इस शक्तिपीठ के भैरव हैं यह मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के बीच में स्थित है ऐसा बताया जाता है कि जो भक्त कामाख्या देवी की यात्रा करता है उसको भैरव के दर्शन अवश्य करने होते हैं यदि कोई भक्त भैरव के दर्शन नहीं करता है तो उसकी कमाख्या देवी की यात्रा अधूरी मानी जाती है कामाख्या मंदिर की यात्रा को पूरा करने के लिए और अपनी सभी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए कामाख्या देवी के दर्शन के बाद उमानंद भैरव के दर्शन करना बहुत ही जरूरी है अन्यथा आपको अपनी यात्रा का फल नहीं मिल पाएगा।
  • अगर आप कामाख्या मंदिर जाने की सोच रहे हैं तो इसके लिए सबसे अच्छा मौसम अक्टूबर से मार्च तक माना गया है कामाख्या मंदिर के लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर गुवाहाटी है गुवाहाटी में आपको आने जाने के लिए सुविधाएं उपलब्ध है गुवाहाटी में एयरपोर्ट भी है आप कामाख्या मंदिर के पास ही नवग्रह मंदिर महाकाल भैरव मंदिर ऋषि विशिष्ट का आश्रम घूम सकते हैं।

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