अध्यात्म

महालक्ष्मी व्रत का हुआ शुभारंभ, इस विधि से करें पूजा, धन-संपत्ति की होगी प्राप्ति

शास्त्रों के अनुसार माता लक्ष्मी जी को धन की देवी कहा जाता है। यदि इनकी कृपा किसी व्यक्ति पर हो तो उस व्यक्ति के जीवन में धन से जुड़ी हुई परेशानियां उत्पन्न नहीं होती है। व्यक्ति अपना जीवन सुखी पूर्वक व्यतीत करता है। आपको बता दें कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को महालक्ष्मी व्रत होता है। इस साल महालक्ष्मी व्रत 25 अगस्त से आरंभ हो गया है। अगर आप इन दिनों में महालक्ष्मी जी की पूजा करते हैं तो इससे आपको शुभ फल की प्राप्ति होती है। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो महालक्ष्मी का यह पर्व 3 दिनों तक मनाते हैं और कई लोग यह व्रत 16 दिनों तक करते हैं। महालक्ष्मी व्रत 16 दिनों तक रखा जाता है जो लोग 16 दिनों तक यह व्रत नहीं रख पाते वह पहले और आखिरी दिन का व्रत कर सकते हैं। यदि किसी कारणवश आप यह व्रत शुरू नहीं कर पाए हैं तो आप इन दिनों में माता लक्ष्मी जी की पूजा अवश्य कीजिए।

महालक्ष्मी व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त

लक्ष्मी व्रत प्रारंभ: 25 अगस्त 2020 दिन मंगलवार से

महालक्ष्मी व्रत समापन: 10 सितंबर 2020 दिन गुरुवार तक

महालक्ष्मी व्रत शुभ मुहूर्त: लक्ष्मी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः काल 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा, इसके पश्चात शाम को 7:00 बजे से 9:00 बजे तक पूजा की जाएगी। आप इनकी पूजा के दौरान लक्ष्मी जी को भोग लगाकर आरती कीजिए। ज्योतिष के जानकारों का ऐसा बताना है कि जिस घर के अंदर महालक्ष्मी व्रत के दिनों में पूजा होती है उस घर में माता लक्ष्मी जी वास करती हैं।

महालक्ष्मी व्रत पूजा विधि

  • आप महालक्ष्मी व्रत पर प्रातः काल में उठ जाएँ और अपने सभी कार्यों से निवृत्त होकर स्नान कर लीजिए, इसके बाद आपको व्रत का संकल्प लेना होगा। व्रत संकल्प के दौरान आप मंत्र “करिष्यsहं महालक्ष्मि व्रतमें त्वत्परायणा, तदविघ्नेन में यातु समप्तिं स्वत्प्रसादत:।।” का जाप करें।
  • इस दिन आप पूजा स्थल पर हल्दी से कमल बनाकर उस पर माता लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित कीजिए। मूर्ति के समक्ष आप सोने-चांदी के सिक्के, फल, फूल और श्री यंत्र रखें।
  • माता लक्ष्मी जी की पूजा के दौरान आप कुमकुम, चावल और फूल अर्पित कीजिए। आपको महालक्ष्मी व्रत में माता लक्ष्मी जी की हाथी पर बैठी हुई मूर्ति को लाल कपड़ा के साथ विधि-विधान के साथ इनकी स्थापना करनी होगी।
  • आप महालक्ष्मी व्रत के दिन श्री यंत्र या फिर महालक्ष्मी यंत्र को माता लक्ष्मी जी के समक्ष स्थापित करके इसकी पूजा कीजिए। इससे आपके जीवन की परेशानियां और दरिद्रता दूर होंगीं।
  • महालक्ष्मी व्रत में आप दक्षिणावर्ती शंख में गंगा जल और दूध डालकर देवी लक्ष्मी जी की मूर्ति का अभिषेक करें, इससे माता लक्ष्मी जी की कृपा मिलेगी।
  • आप इनकी पूजा में कमल के फूल अर्पित कीजिए क्योंकि माता लक्ष्मी जी को कमल का फूल अत्यधिक पसंद है।
  • आप महालक्ष्मी व्रत पर माता लक्ष्मी जी की पूजा के दौरान कमलगट्टे की माला और कुछ कौड़ी अर्पित कीजिए। पूजा खत्म होने के बाद आप इन दोनों चीजों को अपनी तिजोरी या लॉकर में रख दीजिए।

महालक्ष्मी व्रत का महत्व

अष्टमी के दिन प्रारंभ होने वाला महालक्ष्मी व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसको दूर्वा अष्टमी व्रत भी कहा जाता है। दूर्वा अष्टमी को दूर्वा घास की पूजा होती है। अगर आप महालक्ष्मी व्रत के दिनों में विधि-विधान पूर्वक पूजा करते हैं तो इससे सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और संपदा की प्राप्ति होती है। इन दिनों में भक्त माता लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button