अध्यात्म

भगवान शिव के त्रिनेत्र का क्या है रहस्य? जानिए इससे जुड़ा राज

भगवान शिव जी को मानने वाले इस संसार में बहुत अधिक है, सभी लोग शिव जी को प्यार से भोलेनाथ बुलाते हैं, भगवान शिव जी बहुत ही भोले हैं यह अपने भक्तों की पुकार सबसे शीघ्र सुनते हैं, भगवान शिव जी के वैसे तो बहुत से नाम है, त्रिकालदर्शी, शिव जी, महादेव, भोले बाबा, त्रिनेत्र धारी जैसे नामों से लोग इनको पुकारते हैं, आप लोगों ने भगवान शिव जी के मस्तिष्क पर तीसरी आंख देखा होगा, अक्सर आप लोगों ने तस्वीरों में यह बात गौर किया होगा कि उनके मस्तिष्क पर तीसरा नेत्र है, परंतु क्या आप भगवान शिव जी के त्रिनेत्र का रहते जानते हैं? अगर हम पुराणों के अनुसार देखें तो भगवान शिव जी के अति प्रचंड होने पर उनके मस्तिष्क पर ठीक नाक के ऊपर त्रिनेत्र खुलता है।

अगर हम शिवपुराण की कथा के अनुसार देखें तो जब माता सती जी ने अपने पिता के घर में हो रहे यज्ञ कुंड में अपने आपको स्वाहा कर लिया था तब भगवान शिव जी अत्यधिक क्रोधित हुए थे और उन्होंने गुस्से में आकर अपना त्रिनेत्र खोल दिया था, उस समय पूरा ब्रह्मांड खतरे में आ गया था, इसके अतिरिक्त एक कथा के अनुसार जब प्रेम के देवता कहे जाने वाले कामदेव ने भगवान शिव जी की तपस्या को भंग किया था, तब शिवजी ने अपना त्रिनेत्र खोला था और त्रिनेत्र की अग्नि से कामदेव को अपना जीवन खोना पड़ गया था।

जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं भगवान शिव जी तपस्वी है, यह हमेशा तपस्या में लीन रहते हैं, कैलाश पर्वत के ऊपर यह हमेशा तपस्या में लगे रहते हैं, तप से ही आंतरिक शक्तियां जागृत होती रहती हैं, भगवान शिव जी ने तपस्या से ही अपने त्रिनेत्र को जागृत किया है, इसी वजह से इनको त्रिकालदर्शी भी कहा जाता है, त्रिनेत्र त्रि शक्ति को प्रदर्शित करता है, काल के तीन रूप भूत, वर्तमान और भविष्य कल का भी इसमें कुछ नहीं छुपा हुआ है, अगर हम विद्वानों के अनुसार देखें तो यह त्रिनेत्र स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश त्रि शक्ति का घोतक है, तीनों देवों में भगवान शिव जी को ही त्रिलोचन कहा जाता है।

अगर हम विज्ञान और योग के अनुसार तीसरी आंख के रहस्य के बारे में जाने तो जहां पर भगवान शिवजी की तीसरी आंख स्थित है, उस स्थान को पीनियल ग्लैंड कहा जाता है, यह ग्रंथि ऐसे हारमोंस को इस तरह स्त्रावित करती रहती है जो मनुष्य को सोने और जागने में मदद करती है, यदि कोई भी इस दिव्य शक्ति को जागृत कर देता है तो वह अपनी बंद आंखों से भी संसार की कोई भी चीज देख सकता है, हिंदू धर्म में तिलक लगाने की परंपरा पुराने समय से ही चली आ रही है, जब कोई पूजा पाठ या शुभ कार्य होता है तो माथे पर तिलक अवश्य लगाया जाता है, माथे पर तिलक लगाने का बहुत महत्व माना गया है, अगर आप अपने माथे के बीच में तिलक लगाते हैं तो इससे आप ऊर्जावान रहते है।

भगवान शिव जी के त्रिनेत्र से जुड़े हुए यह कुछ रहस्य थे जिनके बारे में हमने आपसे जिक्र किया है, भगवान शिव जी की तीसरी आंख से जुड़ी जुड़े हुए रहस्य का उल्लेख पुराणों में भी किया गया है और विज्ञान व योग के अनुसार भी तीसरी आंख की विशेषता के बारे में बताई गई है।

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