अध्यात्म

30 जून को है रवि प्रदोष व्रत, जानिये पूजा के नियम और शुभ मुहूर्त, इस तरह करें शिवजी को प्रसन्न

हिंदू धर्म सभी धर्मों में सबसे पुराना माना जाता है. हिंदू धर्म में अनेकों देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है और हर देवी-देवता की अपनी एक अलग मान्यता होती है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को त्रिदेव कहा गया है. शिवजी की कल्पना एक ऐसे देव के रूप में की जाती है जो कभी संहारक तो कभी पालक होते हैं. भगवान शिव को संहार का देवता भी कहा जाता है. इसी तरीके से भगवान शिव के कुल 12 नाम प्रख्यात हैं. पूरे भारत में शिवजी के भक्तों की संख्या सबसे अधिक है. शिव भगवान अपने अनोखे रूप की वजह से सबसे अलग भी दिखते हैं. महिला से लेकर पुरुष सभी उनकी भक्ति में लीन रहते हैं. इस रविवार को भक्तों को मौका मिल रहा है कि वह भगवान शिव की महाकृपा पा सकें. हिंदू शास्त्र में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का दिन कहा जाता है. इसे रवि प्रदोष के नाम से भी जानते हैं क्योंकि यह रविवार को पड़ता है.

इस बार प्रदोष व्रत 30 जून को है. इस व्रत को करने से व्यक्ति लंबा और निरोगी जीवन प्राप्त कर सकता है. यह व्रत जीवन के सारे दुख, संकट दूर करके व्यक्ति को दीर्घायु प्रदान करता है. हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है. किसी भी प्रदोष व्रत में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना शाम के समय सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है. इस व्रत को करके कई प्रकार के रोगों को आसानी से दूर किया जा सकता है.

रवि प्रदोष व्रत के दिन कैसे करें भगवान शिव की पूजा

* सबसे पहले सूर्योदय होने से पहले स्नान कर लें और साफ़ हल्के सफ़ेद या गुलाबी वस्त्र धारण कर लें.

* सूर्य देवता को जल देने के लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल करें. जल में शक्कर डालकर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें. इसके बाद अर्घ्य दिए जल का छींटा अपनी दोनों आंखों पर दें.

* मन ही मन पूरा दिन निराहार भगवान शिव का मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ जाप करते रहें.

* शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव को चावल की खीर और फल का भोग लगायें.

* वहीं आसन पर बैठ जाएं और ॐ नमः शिवाय के मंत्र या पंचाक्षरी स्तोत्र का 5 बार पाठ करें.

रवि प्रदोष के व्रत में बरतें ये सावधानियां

* घर और घर के मंदिर की साफ़ सफाई का रखें विशेष ध्यान.

* साफ़ सुथरे कपड़े पहनकर ही पूजा करें.

* व्रत विधान के दौरान बुरे विचारों को मन से दूर रखें.

* काले नीले वस्त्र गलती से भी न पहनें.

* सारे व्रत विधान में खुद को भगवान शिव को समर्पित करके पूजा करें.

इस तरह करें भगवान शिव को प्रसन्न

* जिनकी सरकारी नौकरी में दिक्कत आ रही है वह रवि प्रदोष के दिन शाम के समय भगवान शिव को कच्चे दूध से स्नान कराएं और साथ ही गुलाब का इत्र अर्पण करें.

* सूर्य से संबंधित रोगों जैसे आंखों और हड्डियों की समस्या के लिए सफ़ेद चंदन में गंगाजल मिलाकर इसका लेप रवि प्रदोष के दिन शाम के समय शिवलिंग पर करें. जब रोग ठीक हो जाए तो जरूरतमंद लोगों को भोजन और दवा का दान करें.

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