शनिदेव अपनी पत्नी संग यहाँ देते हैं दर्शन, बड़ी संख्या में भक्त लेने आते हैं आशीर्वाद

अध्यात्म

शनिदेव के प्रकोप से सभी लोगों को डर लगता है, शनि देव न्याय के देवता है और इनका न्याय मनुष्य के कर्मों पर आधारित होता है, ज्योतिष में भी शनि देव को क्रूर ग्रह के रूप में माना गया है, जो व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे और बुरे कर्म करता है उसी के अनुसार शनि देवता फल प्रदान करते हैं, लोग शनिदेव की बुरी दृष्टि से मुक्ति पाने के लिए इनकी पूजा अर्चना करते हैं, देश भर में ऐसे बहुत से मंदिर मौजूद हैं जहां पर शनि देवता अपने भक्तों को अकेले दर्शन देते हैं, इन मंदिरों में भक्तों की रोजाना ही भारी भीड़ देखने को मिलती है, लोग अपने कष्टों से मुक्ति पाने के लिए इन मंदिरों में शनि देव के दर्शन करने जाते हैं, परंतु आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं जहां पर शनिदेव अकेले नहीं बल्कि अपनी पत्नी स्वामिनी के साथ विराजमान है और शनिदेव के इस पावन स्थल पर दोनों की ही पूजा अर्चना होती है।

हम आपको शनि देव के जिस पावन स्थल के बारे में जानकारी दे रहे हैं, यह शनिदेव का मंदिर छत्तीसगढ़ के कवर्धा में स्थित है, इस मंदिर तक पहुंचने का मार्ग बहुत ही दुर्लभ माना गया है, परंतु इन सब के बावजूद भी भक्त बड़ी संख्या में यहां पर शनि देव के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं, भगवान शनिदेव का यह मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य के कवर्धा जिले के करियाआमा गांव में बना हुआ है, ऐसा बताया जाता है कि यहां पर शनि देव की जो मूर्ति मौजूद है यह पांडव काल से ही यहां पर स्थित है।

यहां के स्थानीय लोगों का ऐसा कहना है कि यहां पर शनि देव की जो मूर्ति स्थापित है वह पांडवों द्वारा की गई है, जब पांडव अज्ञातवास काट रहे थे तब उसी दौरान इस जगह पर जंगल में उन्होंने अपना समय गुजारा था, भगवान श्री कृष्ण जी के कहने पर पांडवों ने यहां पर शनिदेव की मूर्ति स्थापित की थी, यहां पर शनिदेव को भक्तों द्वारा तेल अर्पित किया जाता था, ऐसा बताया जाता है कि यहां पर शनि देव की जो मूर्ति स्थापित है उसके ऊपर लगातार तेल अर्पित करने की वजह से काफी धूल मिट्टी की परत जम गई थी, जब इसको हटाया गया तब यहां पर शनि देवता के साथ उनकी पत्नी स्वामिनी की भी मूर्ति मिली थी।

देशभर के सभी शनि मंदिरों में से यह शनि मंदिर एकमात्र ऐसा है जहां पर शनि देवता अपने भक्तों को अपनी पत्नी के साथ दर्शन देते हैं और इन दोनों की पूजा-अर्चना होती है, वैसे तो वर्ष भर शनि देव के इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है, भक्त यहां पर शनि देव के दर्शन करके अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करते हैं, परंतु शनि जयंती पर यहां भक्तों की बहुत अधिक भीड़ उमड़ती है और शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, यहां पर शनि देवता का अभिषेक करके विशेष पूजा-अर्चना होती है, उसके पश्चात सामूहिक भोज का आयोजन भी होता है।

अगर आप शनि देवता के इस मंदिर में जाने के इच्छुक है तो आपको कवर्धा जिले मुख्यालय से भोरमदेव मार्ग से होते हुए जाना होगा, लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद छपरी नामक गांव मिलेगा, इसके आगे अगर आप 500 मीटर की दूरी तय करेंगे तो प्राचीन मड़वा महल आएगा, यहां पर जंगल है, जंगल के बीचो-बीच से होते हुए आपको पथरीले मार्ग मिलेंगे, जब आप इन सभी को पार कर लेंगे तब करियाआमा गांव पहुंच जाएंगे, इसके बाद आपको 4 किलोमीटर की कठिन दूरी तय करनी होगी, करियाआमा गांव में ही जंगलों के बीचो-बीच शनि देव का यह मंदिर मौजूद है जहां पर शनि देवता अपनी पत्नी के साथ भक्तों को दर्शन देते हैं और भक्त भी इनका आशीर्वाद पाने के लिए इस कठिन मार्ग को पार करते हुए इस मंदिर तक पहुंचते हैं।


Leave a Reply