अध्यात्म

देवी माता इस मंदिर में मुंह मांगी मुरादें करती है पूरी, भक्तों का लगा रहता है तांता

सभी लोग भगवान की पूजा पाठ अवश्य करते हैं और इनका भगवान के प्रति अटूट विश्वास देखने को मिलता है आप लोगों ने शुरू से ही यही सुना होगा कि अगर भगवान का आशीर्वाद किसी व्यक्ति पर बना रहे तो व्यक्ति को कभी भी अपने जीवन में किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है भगवान के आशीर्वाद से व्यक्ति अपना जीवन खुशहाली पूर्वक व्यतीत करता है वैसे देखा जाए तो हमारे देश में बहुत से मंदिर मौजूद है जहां पर लोग अपनी इच्छाओं को पूरा करने और मन की शांति प्राप्त करने के लिए जाते हैं इन मंदिरों में जाकर लोगों को मानसिक शांति प्राप्त होती है और वह अपने सभी दुखों से छुटकारा प्राप्त करते हैं परंतु आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं जिस मंदिर के अंदर माता रानी के भक्तों को रुकने की अनुमति नहीं दी जाती है ऐसा बताया जाता है कि जो व्यक्ति इस मंदिर के अंदर रुकता है वह सुबह का सूरज नहीं देख पाता है।

दरअसल, हम आपको जिस माता रानी के मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं यह मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर में स्थित है इस मंदिर के बारे में लोगों का ऐसा बताना है कि अगर इस मंदिर के अंदर कोई भी व्यक्ति रात के समय रुकने की कोशिश करता है तो वह अगली सुबह नहीं देख पाता है यह मंदिर ऊंची पहाड़ियों पर बना हुआ है परंतु इन सबके बावजूद भी भक्त मंदिर के दर्शन के लिए भारी की संख्या में जाते हैं यह मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है इस मंदिर के अंदर माता शारदा की पूजा की जाती है परंतु इसके साथ-साथ देवी काली, दुर्गा, श्री गौरीशंकर, शेषनाग, श्री काल भैरवी, फूलमती माता, ब्रह्मदेव, हनुमान जी और जलापा देवी की भी पूजा की जाती है।

माता के इस मंदिर के समीप तहसील के पास त्रिकूट पर्वत स्थित है इस मंदिर को मैहर देवी का मंदिर भी कहा जाता है जो भक्त इस मंदिर में माता रानी के दर्शन के लिए जाता है उसको 1063 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि माता शारदा जी से अगर कोई मनोकामना मांगी जाए तो वह मुंह मांगी मुरादें पूरी करती है इस मंदिर के अंदर भक्त मन्नत के धागे भी बांधते हैं और जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तो इस मंदिर के अंदर दोबारा दर्शन करने के लिए जरूर आते हैं।

माता रानी के इस मंदिर में दर्शन के लिए लोग वर्षों से आ रहे हैं और उनका यह कहना है कि इस मंदिर में आल्हा और उदल आकर सबसे पहले माता शारदा जी की पूजा और श्रृंगार करते हैं उसके बाद ही भक्तों के लिए मंदिर के पट खुलते हैं यहां के लोगों का ऐसा मानना है कि आल्हा और उदल माता के सबसे बड़े भक्त थे ऐसा बताया जाता है कि इन दोनों के द्वारा ही सबसे पहले जंगलों के बीच शारदा देवी के मंदिर की खोज हुई थी इन दोनों ने 12 वर्षों तक तपस्या करके देवी माता को प्रसन्न किया था और उनसे अमरता का वरदान लिया था वर्तमान समय में भी रोजाना माता शारदा के दर्शन सबसे पहले आल्हा और उदल करते हैं।

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