आखिर हनुमान जी क्यों हैं श्रीराम जी के इतने प्रिय, जानिए बजरंगबली जी के खास गुण

अध्यात्म

महाबली हनुमान जी को सबसे शक्तिशाली देवताओं में गिना जाता है, वैसे देखा जाए तो सभी भगवान के अंदर समस्त रूप अपने आप में पूर्ण है परंतु हनुमान जी एकमात्र ऐसे देवता हैं जो किसी भी कार्य को सफल बना सकते हैं, भगवान हनुमान जी के अंदर ऐसे बहुत से गुण मौजूद है जिसकी वजह से प्रभु राम के यह सबसे प्रिय रहे है, बजरंगबली जी के यह गुण हमारे जीवन में एक बड़ा बदलाव लाने की शक्ति रखते है, गोस्वामी तुलसीदास जी सुंदरकांड को लिपिबद्ध करते समय हनुमान जी के गुणों पर विचार करते रहे थे, गोस्वामी तुलसीदास जी के मन में जो भी गुण उत्पन्न हुए थे वह सभी हनुमान जी के अंदर मौजूद थे, आज हम आपको हनुमान जी के कुछ विशेष गुणों के बारे में जानकारी देने वाले हैं, जिसकी वजह से यह भगवान श्री राम जी के अति प्रिय है, इन गुणों से हमको अपने जीवन की नई दिशा प्राप्त हो सकती है।

इन गुणों की वजह से हनुमान जी, श्रीराम जी के हैं इतने प्रिय

समर्पण और आदर्श

महाबली हनुमान जी के अंदर भगवान श्री राम जी के प्रति अपार श्रद्धा थी, यह पूरी तरह से विश्वास और सामान के प्रति समर्पित है, जब भगवान श्री राम जी उपस्थित नहीं होते थे तब हनुमान जी इनके मान सम्मान की पूरी तरह से रक्षा करते थे, जब भगवान श्री राम जी ने हनुमान जी को लंका जाकर सीता माता का पता लगाने के लिए कहा था तब यह सीता माता की खोज में लंका जा पहुंचे थे और वहां पर इन्होंने लंका को जला दिया था, जब यह वापस लौट रहे थे तब वह सीता माता से मिलने के लिए गए थे, तब सीता माता ने हनुमान जी से कहा था कि “पुत्र, हमें यहां से ले चलो” इस पर हनुमान जी ने उनसे कहा था कि “माता मैं आपको यहां से ले जा सकता हूं, परंतु मैं यह नहीं चाहता कि रावण की तरह मैं आपको यहां से चोरी से ले जाऊं, रावण का अंत करने के पश्चात प्रभु राम जी आदर सहित आपको यहां से ले जाएंगे” महाबली हनुमान जी ने अपने इन्हीं गुणों की वजह से अष्ट सिद्धियों और नव नीतियों की प्राप्ति की थी।

हमेशा सतर्क रहना

महाबली हनुमान जी के अंदर यह बहुत ही खास गुण था कि वह अपना मनोबल हमेशा बनाए रखते थे, यह अपने मस्तिष्क को अपने नियंत्रण में रखते थे, जब लक्ष्मण जी अचेत अवस्था में थे तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए निकल पड़े थे, तब इन्होंने पहाड़ सहित ही संजीवनी बूटी लेकर आ गए थे, यहां पर यह पता चलता है कि हनुमानजी के अंदर निर्णय लेने की क्षमता अधिक थी, हनुमान जी के इस गुण से यह सीख मिलती है कि हमें अपना दिमाग हमेशा सक्रिय रखना चाहिए।

बौद्धिक कुशलता, वफादारी और नेतृत्व क्षमता

जब राम-रावण का युद्ध हो रहा था तब उस समय के दौरान हनुमान जी ने पूरी वानर सेना का ठीक प्रकार से नेतृत्व संचालन किया था, सुग्रीव और बाली के बीच जब संघर्ष हो रहा था तब उस दौरान प्रभु राम जी को बाली के युद्ध के लिए राजी करना, क्योंकि एक सुग्रीव ही प्रभु राम की मदद कर सकता था, इस प्रकार से हनुमान जी ने सुग्रीव और प्रभु श्रीराम दोनों के कार्यों को अपने बुद्धि कौशल और चतुराई से बहुत ही सरल बना दिया था, हमको यहां पर हनुमान जी की मित्र के प्रति वफादारी और आदर्श स्वामी भक्ति देखने को मिलती है, महाबली हनुमान जी ने असंभव कार्य को भी संभव बना दिया था, जब इन्होंने विजय प्राप्त की तब उन्होंने अपनी सफलता का सारा श्रेय “सो सब तव प्रताप रघुराई” कहकर अपने स्वामी को समर्पित कर दिया था, पूरी मेहनत करना पर श्रेय प्राप्ति की इच्छा ना रखना सेवक का देव दुर्लभ गुण होता है जो हनुमान जी की सबसे बड़ी विशेषता थी।


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