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आखिर क्यों भगवान गणेशजी को अति प्रिय है मोदक? जानिए इसकी मुख्य वजह -
अध्यात्म

आखिर क्यों भगवान गणेशजी को अति प्रिय है मोदक? जानिए इसकी मुख्य वजह

चारों तरफ गणेश चतुर्थी की धूम धाम लगी हुई है, इस वर्ष गणेश चतुर्थी का महापर्व 2 सितंबर 2019 से आरंभ हुआ है, सोमवार के दिन गणेश चतुर्थी मनाया गया था, भगवान गणेश जी के भक्त 10 दिनों तक भगवान गणेश जी का उत्सव मनाते हैं, भगवान गणेश जी की पूजा बड़े ही विधि विधान पूर्वक की जाती है और भक्त इनकी पूजा के दौरान इनको तरह-तरह के भोग लगाते हैं लेकिन भगवान गणेश जी को मोदक सबसे ज्यादा पसंद है, आखिर भगवान गणेश जी को मोदक क्यों पसंद आता है और भगवान गणेश जी को मोदक का भोग क्यों लगाया जाता है? शायद कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो इस रहस्य के बारे में जानता होगा? आज हम आपको इस रहस्य के बारे में बताने वाले हैं कि आखिर भगवान गणेश जी मोदक इतना पसंद क्यों करते हैं।

आखिर क्यों भगवान गणेशजी को अति प्रिय है मोदक?

ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल अवश्य आता होगा कि आखिर भगवान गणेश जी को मोदक का भोग क्यों लगाया जाता है? आखिर भगवान गणेश जी को मोदक अति प्रिय क्यों है? अगर हम एक कथा के अनुसार देखें तो एक बार सभी देवताओं ने माता पार्वती को अमृत से तैयार किया हुआ दिव्य मोदक दिया था, जब मोदक को माता पार्वती के दोनों पुत्रों यानी भगवान गणेश और कार्तिकेय ने देखा तो वह उस मोदक को मांगने लग गए थे, उनकी जिद को देखकर माता पार्वती ने उनको कहा कि यह मोदक अमृत से बना हुआ है इसी वजह से यह तुमको इतनी सरलता से नहीं मिल पाएगा, अगर तुम चाहते हो कि तुम इस दिव्य मोदक को प्राप्त कर पाओ तो इसको पाने से पहले तुमको एक परीक्षा देनी पड़ेगी और जो इस परीक्षा में सफल होगा उसी को यह दिव्य मोदक मिलेगा।

माता पार्वती ने आगे अपने दोनों पुत्रों को कहा कि तुम दोनों में से जो भी धर्माचरण के द्वारा श्रेष्ठता प्राप्त करके सबसे पहले ब्रह्मांड के सभी तीर्थ दर्शन करके वापस लौटेगा वहीं इस मोदक को हासिल कर सकता है, जब माता पार्वती ने इतना कहा तब कार्तिकेय ने माता पार्वती की बात सुनते ही वह अपने वाहन मोर पर सवार होकर ब्रह्मांड के सभी तीर्थ दर्शन करने के लिए निकल गया परंतु भगवान गणेश जी का वाहन मूषक बहुत छोटा था और वह उड़ भी नहीं सकता था इसी वजह से भगवान गणेश जी ने ब्रह्मांड के तीर्थ स्थल के दर्शन करने की बजाय उन्होंने अपने माता-पिता शिव पार्वती की परिक्रमा की और उनकी पूजा की।

भगवान गणेश जी ने अपने माता पिता शिव पार्वती की परिक्रमा की, जब माता पार्वती ने भगवान गणेश जी को ऐसे करते हुए देखा तो उन्होंने कहा कि समस्त तीर्थों में किया गया स्नान, सभी देवी देवताओं को किया गया नमस्कार, यज्ञ, अनुष्ठान, सभी साधना माता-पिता के पूजन के बराबर नहीं हो सकते हैं, यह सबसे ऊपर होता है, इसी वजह से इस दिव्य मोदक का हकदार गणेश हैं, तभी से भगवान गणेश जी को मोदक का भोग लगाया जाता है।

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा बताया जाता है कि भगवान गणेश जी का एक दांत परशुराम जी के युद्ध में टूट गया था, जिसकी वजह से उनको कुछ भी चीजें खाने में काफी परेशानी होती थी क्योंकि अगर कोई भी चीज खाई जाए तो उनको चबाना पड़ता है लेकिन मोदक काफी मुलायम होता है, जिसको चबाना नहीं पड़ता है, यह मुंह में जाते ही घुल जाता है, इसीलिए भगवान गणेश जी को मोदक अति प्रिय है, अगर आप इनको मोदक का भोग लगाते हैं तो यह अति प्रसन्न होते हैं और इनकी कृपा दृष्टि आप के ऊपर हमेशा बनी रहती है।

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