अध्यात्म

शनिदेव के इस प्रचानी मंदिर में उन्हें तेल चढ़ाने के बाद लगाया जाता है गले, मुराद होती है पूरी

शनि देव को तेल चढ़ाने से इनके प्रकोप से बचा जा सकता है और शनि की वक्र दृष्टि से भी रक्षा होती है। हर शनिवार के दिन लोग मंदिर में जाकर शनि देव के सामने तेल का दीपक भी जरूर जलाया करते हैं और उनसे अच्छे जीवन की कामना करते हैं। हमारे देश में अनगिनत शनि देव के मंदिर मौजदू है और इन्हीं मंदिरों में से एक ऐसा मंदिर भी है, जहां पर शनि देव को तेल चढ़ाने के बाद उन्हें गले लगाया जाता है। इस मंदिर का नाम शनिश्चरा मंदिर है और ये मंदिर एक प्रचानी मंदिर है।

कहां पर है शनिश्चरा मंदिर

शनिश्चरा मंदिर मध्य प्रदेश के ग्वालियर से 18 किलोमीटर दूर मुरैना जिले में स्थित है। इस मंदिर में एक बड़ा गड्ढा बना हुआ है और इस गड्ढा की पूजा भी लोगों द्वारा की जाती है। इस मंदिर में आने वाले लोग पहले शनि देव के सामने तेल का दीपक जलाते हैं, फिर उन्हें तेल अर्पित करते हैं और तेल अर्पित करने के बाद शनि देव की मूर्ति से गले मिलते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में आकर शनि देव को तेल चढ़ाने से और इनसे गले मिलने से शनि देव की वक्र दृष्टि कभी भी नहीं पड़ती है।

शनिश्चरा मंदिर से जुड़ी कथा

शनिश्चरा मंदिर से एक कथा जुड़ी हुई है जो कि रामायण काल की है। रामायण के अनुसार रावण ने सारे ग्रहों को अपना बंधी बना लिया था और सभी ग्रहों को अपनी कैद में कई सालों तक रखा था। वहीं जब हनुमान जी लंका में आए तो वो सीता मां को खोजने लगे और सीता मां से मिलकर उन्होंने राम जी का संदेश उन्हें दिया।

कुछ देर बाद हनुमान जी को रावण की सेना ने पकड़ लिया और उनको रावण के पास लेकर चले गए। रावण के आदेश पर हनुमान जी की पूंछ पर आग लगा दी गई और हनुमान जी ने अपनी पूंछ से पूरी लंका को जला दिया। लंका में लगी इस आग के कारण सभी ग्रह रावण की कैद से आजाद हो गए। लेकिन शनि देव को रावण ने जेल में उलटा लटकाया हुआ था। जिसकी वजह से शनि देव के शरीर में काफी दर्द हो रही थी और वो चलने में असमर्थ थे। तब शनि देव ने हनुमान जी से कहा कि वो उनको कन्हीं दूर भेज दें। शनि देव की बात को मानते हुए हनुमान जी ने उन्हें लंका से दूर फेंक दिया और शनि देव इस क्षेत्र में आकर गिर गए। शनि देव के गिरने की वजह से इस जगह पर गड्ढा बन गया और ये गड्ढा आज भी इस जगह पर मौजूद है।

इस जगह पर कुछ समय बाद शनि देव का मंदिर बनाया गया और इस मंदिर में तभी से उन्हें तेल चढ़ाने के बाद गले मिलने की परंपरा चली आ रही है। जो लोग भी इस मंदिर में आकर शनि देव से गले मिलते हैं और उन्हें तेल चढाते हैं उन लोगों की हर तकलीफें दूर हो जाती हैं।

कैसे पहुंचे शनिश्चरा मंदिर

आप ग्वालियर ट्रेन, बस या हवाई मार्ग से पहुंच सकते हैं। ग्वालियर पहुंचने के बाद आपको वहां से शनिश्चरा मंदिर जाने के लिए बस या टैक्सी आसानी से मिल जाएगी।

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