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इस मंदिर में व्यक्ति के कर्मों के आधार पर स्वर्ग-नर्क भेजने का फ़ैसला करते हैं यमराज -
अध्यात्म

इस मंदिर में व्यक्ति के कर्मों के आधार पर स्वर्ग-नर्क भेजने का फ़ैसला करते हैं यमराज

हिंदू धर्म में देवी-देवताओं का काफ़ी महत्व है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार 33 करोड़ देवी-देवता हैं। हर काम के लिए एक अलग देवता हैं, जैसे बारिश के देवता इंद्र हैं तो वहीं आग के देवता अग्नि देव हैं, उसी तरह से मृत्यु का देवता धर्मराज यमराज को माना जाता है। यमराज के भारत में कुछ मंदिर हैं, लेकिन सबसे ख़ास हिमांचल के चंबा जिले में स्थित भरमौर नामक जगह पर बना हुआ इनका एक अनोखा मंदिर है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार मनुष्यों के कर्मों को भगवान लिखते हैं, चित्रगुप्त उसका पाठ करते हैं, मौत के बाद यमदूत मनुष्य की आत्मा को पकड़कर ले जाते हैं और यमराज सज़ा देने का काम करते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें यमराज के इस मंदिर में बहुत ही अँधेरा रहता है। यह देखने में काफ़ी डरावनी जगह लगती है। इसी वजह से कई लोग इस मंदिर में अंदर जाने से डरते हैं और बाहर से ही भगवान यमराज को प्रणाम करके वापस आ जाते हैं। यहाँ के एक ख़ाली कमरे में यमराज विराजमान हैं। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि इसी जगह पर धर्मराज यमराज मनुष्यों के कर्मों का फ़ैसला करते हैं। यह मंदिर देखने में बिलकुल एक घर जैसा दिखता है, जिसमें एक ख़ाली कमरा मौजूद है।

मान्यता है कि इसी कमरे में यमराज आज भी रहते हैं। यहाँ पर एक कमरा और भी है, जिसे चित्रगुप्त कक्ष कहा जाता है। प्राचीनकाल से ही यह मान्यता चली आ रही है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो यमदूत सबसे पहली व्यक्ति की आत्मा को पकड़कर इसी मंदिर में लाते हैं। चित्रगुप्त उसके कर्मों का ब्योरा सुनाते हैं। उसके बाद चित्रगुप्त के सामने वाले कक्ष में आत्मा को ले जाया जाता है। इस कमरे को यमराज की कचहरी कहा जाता है। यहाँ यमराज लोगों को उनके कर्मों के हिसाब से अपना फ़ैसला सुनाते हैं।

मंदिर में मौजूद हैं चार अदृश्य दरवाज़े:

ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में चार अदृश्य दरवाज़े हैं जो सोने, चाँदी और लोहे से बने हुए हैं। यमराज का फ़ैसला आने के बाद यमदूत व्यक्ति के कर्मों के हिसाब से उसे इन्ही दरवाज़ों से लेकर स्वर्ग या नरक जाते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार यमराज के दरबार में भी चार दरवाज़ों का ज़िक्र मिलता है। जो लोग अच्छे कर्म करते हैं, उन्हें सोने, चाँदी के दरवाज़े से ले जाया जाता है। सामान्य कर्म करने वाले को ताम्बे के दरवाज़े से ले जाया जाता है। जबकि जो लोग पाप कर्म करने वाले होते हैं, उनकी आत्मा को लोहे के दरवाज़े से ले जाया जाता है।

लोहे का दरवाज़ा जाता है सीधे नर्क की तरफ़:

लोहे वाला दरवाज़ा कहीं और नहीं बल्कि नरक की तरफ़ जाता है। धर्मराज यमराज का यह मंदिर अपनी इसी मान्यता की वजह से पूरे देश में प्रचलित है। स्वर्ग-नर्क की इन्ही मान्यताओं की वजह से आज भी यहाँ के लोग पाप कर्मों को करने से बचते हैं। क्योंकि अगर पाप कर्म किए जाएँगे तो उन्हें भी यमराज की कचहरी में नरक भेजने की सज़ा मिलेगी। अगर आप भी जीवन में बहुत ज़्यादा पाप कर्म करते हैं तो आज ही सुधर जाइए, नहीं तो आपको भी धर्मराज यमराज की इसी कचहरी में यमदूत हाज़िर करेंगे और आपको भी यमराज नर्क भेज देंगे।

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