शिव पुराण के ये उपाय ग्रहों से संबंधित कष्टों और रोगों से दिलाएंगे मुक्ति, ऐसे करें शिव भक्ति

अध्यात्म

शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति के जीवन में जो भी कष्ट, रोग और विपत्ति उत्पन्न होती है उसके पीछे कहीं न कहीं ग्रह-नक्षत्रों की शुभ-अशुभ स्थिति जिम्मेदार मानी गई है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की दशा खराब चल रही है तो इसके कारण ग्रहों से संबंधित बहुत से रोग उत्पन्न होने लगते हैं और व्यक्ति को अपने जीवन में बहुत से परेशानियों से गुजरना पड़ता है। अगर आप ग्रहो को शांत करने के लिए कुछ उपाय करते हैं तो आप किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी से मुक्ति पा सकते हैं। शिव पुराण में सावन के पवित्र दिनों के कुछ उपायों के बारे में जानकारी दी गई है। अगर व्यक्ति अपनी कुंडली में ग्रहों की शुभ-अशुभ स्थिति के अनुसार भगवान शिव जी की भक्ति करता है तो इससे ग्रहों से संबंधित सभी प्रकार के कष्टों और बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है।

ग्रहों के अनुसार रोगों से मुक्ति पाने के लिए करें यह उपाय

सूर्य ग्रह

शिव पुराण के अनुसार यदि सूर्य ग्रह की स्थिति किसी व्यक्ति की कुंडली में खराब है तो इसके कारण सिर दर्द, आंखों से संबंधित रोग, हड्डियों से जुड़ी हुई बीमारियां आदि उत्पन्न होने लगती है। अगर आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो सावन महीने में शिवलिंग की पूजा आक के फूल, पत्तों और विल्वपत्रों से कीजिए। इससे आपको सभी रोगो से राहत मिलेगी।

चंद्रमा ग्रह

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति खराब है तो इसकी वजह से व्यक्ति को नजला, जुखाम, खांसी, मानसिक परेशानियां, रक्त से संबंधित रोग उत्पन्न होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में आपको सावन के पवित्र महीने में शिवलिंग का काले तिल और दूध से रुद्राभिषेक कीजिए, इसके अलावा आप शिवलिंग का रुद्री पाठ भी कर सकते हैं।

मंगल ग्रह

शिव पुराण के अनुसार मंगल की स्थिति खराब होने की वजह से व्यक्ति को रक्त दोष उत्पन्न होने लगता है। ऐसे में आप सावन माह में शिवलिंग का गिलोय, जड़ी-बूटी के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें।

बुध ग्रह

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध का बुरा प्रभाव है तो इसकी वजह से गुर्दे का रोग, चर्म रोग जैसी परेशानियां उत्पन्न होने लगती है। इन बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए आप श्रावण माह में विदारा या फिर जड़ी-बूटियों के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें, इससे आपको राहत मिलेगा।

बृहस्पति ग्रह

शिव पुराण के अनुसार बृहस्पति ग्रह की कुंडली में दशा खराब होने की वजह से व्यक्ति को लीवर, चर्बी, आंत से जुड़ी हुई परेशानियां उत्पन्न होने लगती है। ऐसे में आप दूध में हल्दी मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित कीजिए।

शुक्र ग्रह

शुक्र ग्रह की कुंडली में खराब स्थिति होने की वजह से शारीरिक कमजोरी, निर्बलता, वीर्य की कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है। ऐसे में आप पंचामृत, शहद और घृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।

शनि ग्रह

व्यक्ति की कुंडली में शनि का बुरा प्रभाव होने की वजह से जोड़ों में दर्द, वात रोग, मांसपेशियों का दर्द आदि जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है। अगर आप शनि ग्रह से संबंधित रोगों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो इसके लिए आप गन्ने के रस और छाछ से शिवलिंग का अभिषेक कीजिए।

राहु और केतु

राहु और केतु को पापी ग्रहों किस श्रेणी में माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु-केतु का अशुभ प्रभाव चल रहा है तो इसके कारण मानसिक परेशानियां, अधरंग, सिर चकराना जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है। आप इनके अशुभ प्रभाव से बचना चाहते हैं तो इसके लिए उपर्युक्त सभी वस्तुओं के अलावा मृत संजीवनी का सवा लाख बार जाप करके भांग-धतूरे से शिवलिंग का अभिषेक कीजिए।


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