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30 सालों से संभालकर रखी पत्नी की अस्थियां, नहीं किया अब तक विसर्जन, जानिये क्या है वजह

कहते हैं पति और पत्नी का रिश्ता 7 जन्मों का रिश्ता होता है। दोनों जब शादी करते हैं तो साथ जीने और साथ मरने की कसमें खाते हैं। लेकिन आज के जमाने में ऐसे मजबूत रिश्ते बहुत कम ही देखने को मिलते हैं। शादी के बाद अब तलाक होने में देर नहीं लगती है। वहीं किसी एक पार्टनर की मौत हो जाए तो दूसरा उसे कुछ सालों बाद भूल जाता है। दूसरी शादी भी रचा लेता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी प्रेम कहानी बताने जा रहे हैं जो हम सभी के लिए मिसाल है। हमे इससे कुछ सीखना चाहिए।

30 सालों से संभालकर रखी है पत्नी की अस्थियां

यह प्रेम कहानी तीन साल पहले चर्चा में आई थी। पति का नाम भोलानाथ आलोक है। वह बिहार के पूर्णिया में रहते हैं और एक साहित्यकार भी हैं। भोलानाथ वर्तमान में 90 साल के हैं। उनकी पत्नी का नाम पद्या रानी है। उनका निधन 30 साल पहले हो गया था। भोलानाथ और पद्या के बीच काफी गहरा प्रेम था। दोनों ने साथ जीने और साथ मरने की कसम खाई थी। लेकिन बीवी के असमय निधन के चलते भोलानाथ साथ मरने का वादा निभा नहीं पाए थे। ऐसे में उन्होंने इसका एक अनोखा तरीका खोज लिया।

भोलानाथ ने पत्नी के मरने के बाद उसकी अस्थियों को अपने पास रख लिया। उसे नदी में प्रवाहित नहीं किया। वे बीते 30 सालों से अपनी पत्नी की अस्थियों को संभालकर रखे हुए हैं। दरअसल उनकी इच्छा है कि जब वह मौत को गले लगाएंगे तो उनकी और पत्नी की अस्थियों को एक साथ बहाया जाए। उनके कफन में उनकी पत्नी की अस्थियों को भी स्थान दिया जाए। इस तरह वह पत्नी संग जीने और मरने का अपना वादा निभा सकेंगे।

साथ जीने मरने का वादा करना है पूरा

भोलानाथ की एक ही बेटी है। वह उन्हीं के साथ रहते हैं। उन्होंने बेटी से कह दिया है कि जब वह उनकी चिता में आग लगाए तो साथ में माँ की अस्थियों को भी रख दे। भोलानाथ बताते हैं कि उनकी बीवी बेहद सरल स्वभाव की थी। वे दोनों बहुत छोटे थे तब बचपन में ही परिवार वालों ने उनका ब्याह कर दिया था। वह पत्नी से अक्सर कहा करते थे कि हम एक साथ दुनिया छोड़कर जाएंगे। लेकिन अफसोस की उनकी पत्नी काफी समय पहले ही चली गई।

भोलानाथ अपनी पत्नी से किए वादे को बीते 30 वर्षों से निभा रहे हैं। उनके दामाद अशोक सिंह कहते हैं कि ये चीज उनके अटूट प्रेम को दर्शाती है। उन्होंने पत्नी की अस्थियों को एक पेड़ पर पोटली बांधकर रखा हुआ है। वे जब भी अकेला महसूस करते हैं तो इन अस्थियों के पास बैठकर लंबा समय बिताते हैं। इससे उनके दिल को सुकून मिलता है।

जहां एक तरफ आज के कपल बेवफाई करने में जरा भी देर नहीं करते तो वहीं दूसरी ओर भोलानाथ पत्नी के गुजर जाने के 30 साल बाद भी अपने अटूट प्रेम को निभा रहे हैं। अब इससे बड़ी सच्चे प्रेम की मिसाल भला क्या हो सकती है।

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