अध्यात्म

रविवार को है रवि प्रदोष व्रत, इस दिन करें यह काम, जीवन की परेशानियां होंगी दूर

शास्त्रों के अनुसार देखा जाए तो प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा मानी जाती है। रविवार को आने वाला प्रदोष व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। सनातन धर्म में एकादशी की तरह ही 1 वर्ष में 24 प्रदोष होते हैं। जो भी प्रदोष जिस वार को आता है उसका अपना अपना विशेष महत्व माना गया है और इसके अलग-अलग फल मिलते हैं। आपको बता दें कि 16 अगस्त 2020 यानी रविवार को सिंह संक्रांति के दिन रवि प्रदोष व्रत है और यह बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। रविवार को आने वाला प्रदोष व्रत स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। जो व्यक्ति इस दिन व्रत करता है उसको स्वास्थ्य संबंधित सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

रवि प्रदोष व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त

16 अगस्त 2020 यानी रविवार को रवि प्रदोष व्रत है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से 12:28 बजे तक रहेगा। अमृत काल का समय 17 अगस्त 2020 सुबह 4:22 बजे से 5:57 बजे तक है।

रवि प्रदोष व्रत करने के लिए पूजा सामग्री

अगर आप रवि प्रदोष व्रत करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एक जल से भरा हुआ कलश, बेलपत्र, धतूरा, भांग, कपूर, सफेद पुष्प, आंकड़े का फूल, सफेद मिठाई, सफेद चंदन, सफेद वस्त्र, आम की लकड़ी, हवन सामग्री, धूप-दीप आदि का इंतजाम करना होगा।

जानिए रवि प्रदोष व्रत की कैसे करें पूजा

जो लोग रवि प्रदोष का व्रत कर रहे हैं उनको इस दिन सुबह के समय जल्दी उठकर अपने सभी कार्यों से निवृत्त होकर स्नान करना होगा। इसके बाद आप शिवजी की पूजा कीजिए। आप प्रदोष व्रत के दिन निराहार रहें और पूरे दिन मन ही मन में भगवान शिव जी का प्रिय मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप करते रहिए। इसके पश्चात आपको सूर्यास्त के बाद दोबारा से स्नान करना होगा और भगवान शिव जी का षोडषोपचार से पूजा कीजिए।

आपको बता दें कि रवि प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे उत्तम समय शाम 4:30 बजे से 7:00 बजे तक रहता है। अगर आप इस समय के दौरान पूजा करते हैं तो आपको शुभ फल की प्राप्ति होती है। रवि प्रदोष व्रत की पूजा के दौरान आप भगवान को घी, शक्कर, जौ के सत्तू का भोग लगाएं। इसके पश्चात आपको आठों दिशाओं में आठ दीपक रखकर 8 बार नमस्कार करना होगा।

रविवार को प्रदोष व्रत करने के फायदे

  • अगर व्यक्ति रविवार के दिन रवि प्रदोष का व्रत रखता है तो इससे जीवन सुख-शांति पूर्वक व्यतीत होता है, व्यक्ति को यश की प्राप्ति होती है, व्यक्ति का जीवन निरोगी बनता है और लंबी आयु की प्राप्ति होती है।
  • शास्त्रों के अनुसार रवि प्रदोष का व्रत सूर्य से माना गया है, इसलिए अगर आप इस दिन व्रत करते हैं तो चंद्रमा के साथ सूर्य भी आपके जीवन में सक्रिय रहता है, जिसकी वजह से चंद्रमा और सूर्य से आपको शुभ फल की प्राप्ति होने लगती है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य कमजोर है तो उसको रवि प्रदोष का व्रत अवश्य करना चाहिए। इससे सूर्य से संबंधित सभी परेशानियां दूर होंगी।
  • रवि प्रदोष व्रत करने वाले लोगों को नाम, यश और सम्मान की प्राप्ति होती है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में अपयश योग है तो ऐसी स्थिति में रवि प्रदोष व्रत अवश्य करना चाहिए। इससे सभी दोष दूर होंगे।
  • ऐसा बताया जाता है कि जो व्यक्ति रवि प्रदोष का व्रत रखता है उसके जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।

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